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रविवार, 19 मार्च 2023

बिल्लियों के बारे में महत्वपूण बाते



मूंछें! हम में से कुछ लोगों ने सुना होगा कि अगर मूंछें फिट

होती हैं तो बिल्लियां अंतरिक्ष को मापने के लिए अपनी मूंछों

का उपयोग करती हैं, और आपकी बिल्ली भी ऐसा ही करती

है लेकिन क्या यह सच है? संक्षेप में, हाँ!क्या आप जानते हैं कि बिल्लियों की नाक के दोनों ओर मूंछें ही नहीं होती हैं। उनके ऊपरी होंठ पर, उनकी आँखों के ऊपर (भौं), उनके जबड़े पर, और, मानो या न मानो, उनके सामने के पैरों की पीठ पर भी

मूंछें होती हैं!जब हम अपने प्यारे दोस्तों को गले लगाते और

चूमते हैं तो बिल्ली की मूंछें सिर्फ "बाल" से ज्यादा होती हैं जो हमारे चेहरे को गुदगुदी करती हैं; मूंछें आपकी बिल्ली के परिवेश के बारे में उसके तंत्रिका तंत्र को जानकारी भेजती हैं। जबकि आपकी बिल्ली की मूंछें वास्तव में कुछ भी "महसूस" नहीं करती हैं, वे हवा के प्रवाह में बदलाव या जब कोई वस्तु उनके खिलाफ ब्रश करती है, तो उन्हें महसूस होता है। मूंछें कंपन करती हैं, जो तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क को संकेत भेजती हैं। इन सूक्ष्म परिवर्तनों को महसूस करके, बिल्ली की मूंछें पास की वस्तुओं के आकार, आकार और गति के बारे में जानकारी संचारित करती हैं। इससे उन्हें विशेष रूप से रात में अपने वातावरण को नेविगेट करने में मदद मिलती है!

Rolls- Royce


  रोल्स-रायस की कहानियो में से एक यह है की कम्पनी की तीन-चौथाई कारे अभी भी सड़क पर है |

  लक्जरी बाजार में सफलता की ग्राहक अपने मुलर-आटोवोस बताते है, की ग्राहक अपने मित्रो 

  परिवारों और व्यवासियो सहयोगियों को उनके द्वारा खरीदी गई चीजो के बारे में कुछ अच्छी रोल       

   कहानिओ में बताने में सक्षम होना चाहते है | रोल्स-रायस के रूप में इतिहास में दुबे हुए ब्रांड के 

   लिए यह कोई समस्या नहीं है| इसकी एक कहानी यह है की कंपनी की तीन-चौथाई कारे अभी 

   भी सड़क पर है 'यह एक स्मार्ट निवेश है वे कहते है | मैक्लरें, स्पोर्ट्स फार्मूला 1 रेशिंग टीम के 

  रूप में अपनी विरासत को चित्रित कर रहा है 

शुक्रवार, 17 मार्च 2023

पुनर्जागरण


यूरोप के सांस्कृतिक पुनर्स्थापना अनेक कारणों का परिणाम था|

यह परिवर्तन धीरे-धीरे शताब्दी में हुआ| इस परिवर्तन में असंख्य 

वेयाक्तियो का योगदान था जिन्होंने विभिन्न शेत्रो में ज्ञान, कला ,

साहित्य के छेत्रो में म्हात्वाप्न कार्य किये थे |अंत सांस्कृतिक पुनारुथापन 

कोई आकस्मिक घटना नहीं थी बल्कि परिवर्तन की एक क्रमिक प्रक्रिया 

थी|  इस परिवर्तन के निम्नलिखित कारण थे 

(१) धर्म युद्ध 

(२) व्यापार 

(३) तुर्कों का अधिकार 

(४) कागज़ तथा छापें खाने का प्रयोग